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Saturday, December 6, 2025

रिश्ते 37

 रिश्तों का गणित

अनूठा होता है
जहाँ
बताना और जताना
गिनाना और दिखाना
बातचीत का केंद्र होते हैं
तराजू लिए लोग
नापने-तोलने में व्यस्त रहते हैं
और दूर बैठे रिश्ते
उन पर मुस्कराते हैं
उन पर तरस खाते हैं
और अपना पता बदल लेते हैं
रिश्ते केवल जीवित दिखाई देते हैं
उनमें जीवन होता नहीं है
रिश्ते अपनी गति अनुसार
नियमानुसार
चलते रहते हैं
निर्जीव

बहुत कठिन होता है 
यह जानना
कौन किसका कितना है
मैं किसका कितना हूँ
क्या वो भी मेरा उतना है

उतना-कितना 
मेरा-उसका
रिश्तों में दूरी लाते हैं

बिना किसी जीवन के
ऐसे रिश्ते चलते तो हैं
पर उनमें रुधिर सूखता जाता है
और हम रुक जाते हैं
रिश्ते चलते रहते हैं

कई बार हम भूल जाते हैं
कि यदि हमको कोई
छोटा दिखाई दे रहा है तो
या तो हम उसे बहुत
दूर से देख रहे होते हैं
या फिर
गुरूर से देख रहे होते हैं
थोड़ा पास जाइए
बैठिए, संभलिये, बात करिए
विस्तार समझिए
गणित से परे 
क्षेत्रफल को जानिए 
फिर निर्णय लीजिए
गुरूर को थूकिये फिर कहिए
कोई छोटा है या बड़ा

तलाश
रिश्तों में जीवन ढूँढने की  

Sunday, September 7, 2025

रिश्ते 36

रिश्तों का गणित
अनूठा होता है
हिसाब-किताब
जोड़ना-घटाना
गुणा-भाग
मोल-भाव
लेना-देना
यह सब
रिश्तों को कमजोर करता है
फिर भी
प्रायः जोड़ना-घटाना ही
रिश्तों का मापदण्ड होता
प्रतीत होता है

रिश्ते परे होते हैं
किसी भी गणित से
जोड़ना-घटाना
जहाँ एक ओर
रिश्तों की नींव
कमजोर करता है
वही रिश्तों को
पत्थर बना देता है
रिश्तों की परिधि
रिश्तों के घनत्व को
प्रभावित करती है
रिश्तों की ज्यामिति
प्रकार और पैमाने से इतर होती है
रिश्तों का मूल और ब्याज
रिश्तों के मूल्य, निवेश और प्रत्याय
से बहुत भिन्न होता है
मूल्य, क़ीमत और मोल-भाव
रिश्तों के मूल को
बहुत प्रभावित करता है
मूल की कोई क़ीमत
कभी हो ही नहीं सकती

मोलभाव में उलझे रिश्ते
अभाव व प्रभाव के माध्यम से
रिश्तों को प्रभावित करते हैं
और नकारात्मक विचारों को
जन्म देते हैं

अभाव का अनुभव
और अनुभव का अभाव
सारी गणित
इन्ही के मध्य
चलती रहती है

दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है
व्यक्तित्व के बनाने में
रिश्तों को बनाने में, सजाने-संवारने में
अभाव का अनुभव
सशक्त बनाता है
जड़ों को मज़बूत रखता है
दृष्टिकोण को
परिपक्व बनाता है
तो अनुभव का अभाव
परिपक्वता से दूर रखता है
अक्सर
अपरिपक्वता भी मददगार होती है
रिश्तों को सुधारने में
रिश्तों को बचाने में
अनुभव का अभाव
कई बार व्यक्ति को धरातल पर रखता है
उड़ने से रोकता है

अपने सरल-सहज-नैसर्गिक स्वरूप में
बिना किसी कृतिमता के
रिश्ते चलते रहते हैं

Sunday, June 1, 2025

रिश्ते 35

रिश्तों का भूगोल निराला होता है
दूरियाँ या नज़दीकियाँ
उतनी महत्वपूर्ण नहीं होतीं 
जितना रिश्तों को बनाये रखने का
आशय व रिश्तों में विश्यास,
हम दूर रहकर भी
रिश्ते निभाते हैं
और पास रहते हुए भी
रिश्तों को बिगाड़ लेते हैं.
 
रिश्तों में पारस्परिक प्रेम व स्नेह
बरकरार रहता है,
मीलों दूर रहते हुए भी.

मिलना या न मिल पाना
रिश्तों में दूरी नहीं पैदा करता
यदि रिश्तों में सम्मान भाव हो,
एक दूसरे के प्रति
सहजता व स्नेह का भाव हो.

रिश्ते दूर रहकर भी
बखूबी निभाये जा सकते हैं
यदि रिश्तों में नज़दीकियाँ हों.
ज़बरदस्ती की नज़दीकी से
सुकून की दूरी अच्छी है.
ठीक उसी प्रकार
जैसे नज़दीक रहते हुए भी
बातचीत न होना
और दूर रहते हुए भी
कुशलक्षेम जानने की
उत्सुकता होना
और
मिलने का उत्साह
जीवित रहना

हमनें पढ़ा था 
रहिमन धागा प्रेम का, 
मत तोड़ो चटकाय;
टूटे से फिर ना जुड़े, 
जुड़े गाँठ पड़ जाय।

एक तरफ धागे हैं
जो उलझ कर
और भी करीब आ जाते हैं
एक तरफ रिश्ते हैं
जो जरा सा उलझते ही
टूट जाते हैं

धागे और मोती का भी रिश्ता 
अमिट होता है
उनका साथ 
और एक दूसरे के प्रति 
कृतज्ञता का भाव 
उनकी नज़दीकियाँ 
नजरंदाज नहीं की जा सकतीं हैं. 

सच में
रिश्तों का भूगोल निराला होता है

रिश्ते 34

 रिश्तों का सच जानना

बहुत कठिन हो जाता है,
जब रिश्तों में सरलता का
अभाव होता है।

रिश्तों का जीवट रहना,
उनके जीवित रहने से
कहीं अधिक
महत्वपूर्ण होता है।

कई बार हम
इस प्रश्न का सामना करते हैं
कि क्या रिश्ते सत्य हैं।

मुझे लगता है
सत्य को परिभाषित करना
और उसको रिश्तों में ढूँढना
बहुत ही मुश्किल है।

सत्य सत्य होता है
और रिश्ते रिश्ते होते हैं,
रिश्तों के सच को
जानने से कहीं अधिक
रिश्तों को जानना होता है,
उनके अपने स्वरूप को जानना,
बिना किसी दिमाग़ी मशक़्क़त किए,
बिना किसी गुणा-गणित के,
सहज भाव से।

रिश्ते स्वयं बोलने लगते हैं,
संवाद करने लगते हैं,
अपने जीवट होने का
प्रमाण देने लगते हैं,
रिश्ते चलते रहते हैं। 

Friday, February 7, 2025

रिश्ते 33

रिश्तों का साया 
सुकून देता है, 
अपनी ऊर्जा को 
सकारात्मक तरीक़े से 
प्रयोग करने को प्रेरित करता है, 
चिंताओं से मुक्त रखता है 
और विश्वास को बढ़ाता है। 

रिश्तों का साया 
जहां एक ओर व्यक्ति को 
स्वतंत्र बनाता है 
वहीं दूसरी ओर 
स्वावलम्भन को भी 
सुदृढ़ करता है। 

ऐसा प्रायः कहा जाता है 
कि किसी के साये में 
क्यों जीना 
परंतु यह बात 
रिश्तों के साये पर 
लागू नहीं होती। 

साये का आकार-प्रकार 
घटता-बढ़ता रहता है 
फिर भी उसके आग़ोश में 
शांति का आवास होता है, 
साये के चलायमान होने में ही 
जीवन होता है 
अन्यथा स्थिर साये 
उसके आग़ोश में रह रहे लोगों 
को अस्थिर कर देते हैं। 

विचित्र है सायों का 
गणित, भूगोल और भौतिक विज्ञान, 
जो रिश्तों को तदनुसार 
परिभाषित करता है, 
रिश्ते चलते रहते हैं 
सायों में 
और उनके अभाव में भी।

Sunday, December 22, 2024

काम की बात

‘और भई मिश्रा जी से बात होती है'

'हाँ होती है
जब मिलते हैं होती है’

‘मतलब’

‘जब मिलते हैं तभी होती है'

अब
बात करने के लिए मुलाकात नहीं होती

मुलाक़ात और बात का
यही रिश्ता अब हो गया है
बात के लिए मुलाक़ात नहीं होती,
मुलाक़ात किसी काम के लिए ही होती है
और बात भी काम की ही होती है
बिना काम के बात,
या मुलाकात अब नहीं होती
बात भी नहीं होती
मुलाक़ात, काम, और बात का
यही रिश्ता है अब

बात के लिए मुलाक़ात होती थी
बात के विषय होते थे
और कई बार
विषय आवश्यक भी नहीं होते थे
व्यक्तिगत, पारिवारिक, राष्ट्रीय, अथवा वैश्विक
धार्मिक, सामाजिक, अथवा राजनीतिक
मौलिक-अमौलिक
भौतिक-अभौतिक
देश, काल, परिस्थिति, की बात
घर, बाहर की बात
हाल-चाल की बात
लिखने-पढ़ने की बात
किताबी और किताबों की बात
विचार व विचारकों की बात
दर्शन और दार्शनिकों की बात

अब बात के लिए मुलाकात नहीं होती
ऐसा नहीं है कि कोई बात नहीं होती
मुलाकात होती है तो बात होती है
काम के लिए मुलाकात होती है
मुलाकात होती है तो बस
काम की बात होती है

बात का विषय केवल काम रह गया है

काम-क्रोध-लोभ-मोह
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष

Wednesday, April 24, 2024

रिश्ते 30

गाँठ या यों कहें ग्रंथि
रिश्तों के जीवन में
बाधा भी बनती हैं
और स्वावलोकन का कारण भी,
बेहतर इंसान बनने की ओर
प्रेरित भी करती हैं,
और अहंकार में लिप्त रहने की
ओर खींचती भी हैं।

गाँठे हमेशा अपने रूप को
बदलती हैं,
अनुभव व समय के साथ,
सकारात्मक सोच
व रिश्तों की प्रगाढ़तावश।

परंतु यदि
अपने दम्भ में ग्रसित मानसिकता
व्यक्ति पर हावी होती जाती है
तो यही ग्रंथि
और कठोर हो जाती है,
और शरीर के राख होने तक
उसकी कठोरता जस की तस रहती है।

गाँठ को सरल करने
व उसके स्वरूप को कठोरता से
कोमलता के रास्ते होते हुए
सहज भाव से खोलने की प्रक्रिया में
किसी न किसी को झुकना होता है,
रिश्तों को नैसर्गिक
एवं सुचारु रूप से
जीवित रखने की ख़ातिर।

रिश्ते 37

 रिश्तों का गणित अनूठा होता है जहाँ बताना और जताना गिनाना और दिखाना बातचीत का केंद्र होते हैं तराजू लिए लोग नापने-तोलने में व्यस्त रहते हैं ...