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Sunday, June 1, 2025

रिश्ते 35

रिश्तों का भूगोल निराला होता है
दूरियाँ या नज़दीकियाँ
उतनी महत्वपूर्ण नहीं होतीं 
जितना रिश्तों को बनाये रखने का
आशय व रिश्तों में विश्यास,
हम दूर रहकर भी
रिश्ते निभाते हैं
और पास रहते हुए भी
रिश्तों को बिगाड़ लेते हैं.
 
रिश्तों में पारस्परिक प्रेम व स्नेह
बरकरार रहता है,
मीलों दूर रहते हुए भी.

मिलना या न मिल पाना
रिश्तों में दूरी नहीं पैदा करता
यदि रिश्तों में सम्मान भाव हो,
एक दूसरे के प्रति
सहजता व स्नेह का भाव हो.

रिश्ते दूर रहकर भी
बखूबी निभाये जा सकते हैं
यदि रिश्तों में नज़दीकियाँ हों.
ज़बरदस्ती की नज़दीकी से
सुकून की दूरी अच्छी है.
ठीक उसी प्रकार
जैसे नज़दीक रहते हुए भी
बातचीत न होना
और दूर रहते हुए भी
कुशलक्षेम जानने की
उत्सुकता होना
और
मिलने का उत्साह
जीवित रहना

हमनें पढ़ा था 
रहिमन धागा प्रेम का, 
मत तोड़ो चटकाय;
टूटे से फिर ना जुड़े, 
जुड़े गाँठ पड़ जाय।

एक तरफ धागे हैं
जो उलझ कर
और भी करीब आ जाते हैं
एक तरफ रिश्ते हैं
जो जरा सा उलझते ही
टूट जाते हैं

धागे और मोती का भी रिश्ता 
अमिट होता है
उनका साथ 
और एक दूसरे के प्रति 
कृतज्ञता का भाव 
उनकी नज़दीकियाँ 
नजरंदाज नहीं की जा सकतीं हैं. 

सच में
रिश्तों का भूगोल निराला होता है

रिश्ते 34

 रिश्तों का सच जानना

बहुत कठिन हो जाता है,
जब रिश्तों में सरलता का
अभाव होता है।

रिश्तों का जीवट रहना,
उनके जीवित रहने से
कहीं अधिक
महत्वपूर्ण होता है।

कई बार हम
इस प्रश्न का सामना करते हैं
कि क्या रिश्ते सत्य हैं।

मुझे लगता है
सत्य को परिभाषित करना
और उसको रिश्तों में ढूँढना
बहुत ही मुश्किल है।

सत्य सत्य होता है
और रिश्ते रिश्ते होते हैं,
रिश्तों के सच को
जानने से कहीं अधिक
रिश्तों को जानना होता है,
उनके अपने स्वरूप को जानना,
बिना किसी दिमाग़ी मशक़्क़त किए,
बिना किसी गुणा-गणित के,
सहज भाव से।

रिश्ते स्वयं बोलने लगते हैं,
संवाद करने लगते हैं,
अपने जीवट होने का
प्रमाण देने लगते हैं,
रिश्ते चलते रहते हैं। 

Friday, February 7, 2025

रिश्ते 33

रिश्तों का साया 
सुकून देता है, 
अपनी ऊर्जा को 
सकारात्मक तरीक़े से 
प्रयोग करने को प्रेरित करता है, 
चिंताओं से मुक्त रखता है 
और विश्वास को बढ़ाता है। 

रिश्तों का साया 
जहां एक ओर व्यक्ति को 
स्वतंत्र बनाता है 
वहीं दूसरी ओर 
स्वावलम्भन को भी 
सुदृढ़ करता है। 

ऐसा प्रायः कहा जाता है 
कि किसी के साये में 
क्यों जीना 
परंतु यह बात 
रिश्तों के साये पर 
लागू नहीं होती। 

साये का आकार-प्रकार 
घटता-बढ़ता रहता है 
फिर भी उसके आग़ोश में 
शांति का आवास होता है, 
साये के चलायमान होने में ही 
जीवन होता है 
अन्यथा स्थिर साये 
उसके आग़ोश में रह रहे लोगों 
को अस्थिर कर देते हैं। 

विचित्र है सायों का 
गणित, भूगोल और भौतिक विज्ञान, 
जो रिश्तों को तदनुसार 
परिभाषित करता है, 
रिश्ते चलते रहते हैं 
सायों में 
और उनके अभाव में भी।

Sunday, November 3, 2024

रिश्ते - 32

रिश्तों की रेल
चलती है 
प्यार व विश्वास की 
पटरी पर

कभी सवारी-गाड़ी की तरह
कभी माल-गाड़ी की तरह
तो कभी तीव्र गति से चलने वाली 
मेल एक्सप्रेस
राजधानी एक्सप्रेस
शताब्दी या वन्देभारत की तरह

गाड़ी का प्रकार 
निर्भर करता है
क्षेत्र, काल व परिस्थिति पर
कभी रिश्ते की रेल को 
तीव्र चलना होता है 
तो कभी 
सवारी गाड़ी की तरह 
धीरे-धीरे
इस गाड़ी से चलकर 
गन्तव्य पर पहुँचने में 
समय तो अधिक लगता है 
परंतु इस सफ़र का 
आनंद अलग होता है
सभी से मिलकर
सभी की सुनकर 
और सभी के साथ-साथ चलकर

रिश्ते की रेल का 
वास्तविक सुख 
सवारी गाड़ी में चलने में ही मिलता है
तीव्रता में गन्तव्य तक तो 
हम समय से पहले पहुँच जाते है 
परंतु कई बार साथ चलने वालों के 
ठीक से दर्शन भी नहीं होते
हमें केवल 
पहुँचने की जल्दी होती है

और माल-गाड़ी 
रिश्तों के भार को ढ़ोती हुई 
दिखाई देती है
यों तो माल गाड़ी भी 
उसी पटरी पर चलती है 
जिन पर अन्य गाड़ियाँ चलती हैं
परंतु 
प्यार व विश्वास की पटरी पर माल 
बहुत हिलते-ढुलते 
अपने निर्धारित गन्तव्य पर पहुँचता है
पाथेय के रूप में

किसी विशेष समय में 
तीव्रता अवश्यंभावी होती है 
परन्तु हमेशा तीव्रता का भाव 
रिश्तों में निकटता लाने में 
सहायक नहीं होता

रेल चाहे कोई भी हो 
पटरी एक ही होती है

रिश्तों की रेल 
प्यार व विश्वास की पटरी पर चलती है


Wednesday, July 10, 2024

रिश्ते - 31

रिश्तों से
कभी-कभी उठ जाता है
विश्वास
और अनायास ही
रिश्ते विलुप्त होते जाते हैं.

इतिहास का हिस्सा
बनने से भी कई बार
ऐसे रिश्ते वंचित रहते हैं.

रिश्ते पराजित होते हैं
नियति के अनुसार.
नियति का मोहरा बन
सब कुछ झेलते हैं
रिश्ते.

कालचक्र में फँसे रिश्ते,
परत दर परत
सब कुछ संजो कर रखते हैं
और कई बार
अपनी व्यथा बिना सुनाए ही
ब्रह्म में विलीन हो जाते हैं.

कई बार अपने अतीत में
मुग्ध होकर मुस्कराते भी हैं
और दुःखी भी होते हैं.
कोई उनकी व्यथा
सुनने वाला भी नहीं मिलता है
कई बार.

चलते तो ऐसे रिश्ते भी हैं
अपनी गति से.


Wednesday, April 24, 2024

रिश्ते 30

गाँठ या यों कहें ग्रंथि
रिश्तों के जीवन में
बाधा भी बनती हैं
और स्वावलोकन का कारण भी,
बेहतर इंसान बनने की ओर
प्रेरित भी करती हैं,
और अहंकार में लिप्त रहने की
ओर खींचती भी हैं।

गाँठे हमेशा अपने रूप को
बदलती हैं,
अनुभव व समय के साथ,
सकारात्मक सोच
व रिश्तों की प्रगाढ़तावश।

परंतु यदि
अपने दम्भ में ग्रसित मानसिकता
व्यक्ति पर हावी होती जाती है
तो यही ग्रंथि
और कठोर हो जाती है,
और शरीर के राख होने तक
उसकी कठोरता जस की तस रहती है।

गाँठ को सरल करने
व उसके स्वरूप को कठोरता से
कोमलता के रास्ते होते हुए
सहज भाव से खोलने की प्रक्रिया में
किसी न किसी को झुकना होता है,
रिश्तों को नैसर्गिक
एवं सुचारु रूप से
जीवित रखने की ख़ातिर।

Sunday, February 4, 2024

रिश्ते 29

रिश्तों की ऊन 
बहुत गरमाहट देती है. 

रिश्तों की ऊन से 
हाथ द्वारा बने स्वेटर, 
किसी भी सर्दी में 
गरमी का एहसास देते हैं, 

स्वेटर बनाने वाले 
और 
पहनने वाले के रिश्ते 
ऊन से बंधे रहते है
एक सिरे से दूसरे सिरे तक. 

किसी भी रंग, क़िस्म 
और क़ीमत पर, 
रिश्तों का रंग 
हावी होता है.
 
ऐसे स्वेटर पीढ़ी दर पीढ़ी 
पहने जाते है. 

रिश्तों की ऊन 
बांधे रहती है 
पीढ़ियों को. 

कई बार 
उधेड़े भी जाते हैं 
ऐसे स्वेटर 
और नये रूप में, 
नये फैशन के, 
नये आकार और प्रकार 
में बदल दिये जाते हैं. 

रिश्तों की ऊन 
बहुत गरमाहट देती है. 

आजकल 
ऐसे रिश्ते, ऐसे स्वेटर 
कम ही दीखते हैं.

Tuesday, November 14, 2023

रिश्ते 28

रिश्ते पानी की तरह
साफ़ होते हैं
तो नदी बन
समंदर हो जाते हैं. 

रिश्ते बर्फ़ की तरह
जम भी जाते हैं
और हिम सागर भाँति
पिघलते भी हैं. 

रिश्ते मजबूत होना 
अच्छा होता है
परंतु चिन्ता का विषय होता है
रिश्तों का पत्थर हो जाना.

रिश्तों में लोच ज़रूरी होता है
और लोच के सीमेंट से बने रिश्ते
मजबूत होकर भी पत्थर नहीं होते.

रिश्तों को मिट्टी होने से
बचाना भी होता है
और बिखरने से
सम्हालना भी होता है.

रोड़ी और रोड़े मिलकर
रिश्ते में मज़बूती लाते हैं.

रिश्ते हाथ से रेत की तरह
सरक भी जाते हैं
और ईंट की तरह खड़े भी रहते हैं.

ईंट का जवाब पत्थर से देने से
रिश्ते टूट जाते हैं.

ईंट से बने मकानों को
रिश्ते ही घर बनाते हैं.

ऐसा घर जहां
सुख-दुःख साथ-साथ रहते हैं
और 
जीवन को आनंदमय बनाते हैं.

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और इनको भी पढ़ें - 









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Friday, May 26, 2023

रिश्ते 27

रिश्तों का आकाश क्षेत्र, 
धरती के विस्तार की सीमा से
अधिक होता है
रिश्तों की सूक्ष्मता,
स्थूल कृत्यों से अभिव्यक्त
नहीं की जा सकती

शब्दों, संस्कारों और संधियों से
रिश्तों का निर्माण भी होता है 
और
विस्तार भी

रिश्तों की सूक्ष्मता
भाषा और व्यवहार
पर निर्भर करती है
शब्द स्थूल हैं 
और
शब्दों का भाव 
और उनकी भंगिमा
सूक्ष्म है
भाषा सूक्ष्म है

शब्दों कें प्रयोग का तरीक़ा
और व्यवहार
रिश्तों में स्थायित्व लाता है

रिश्तों का आकाश धन,
धरती के विस्तार की सीमा से
अधिक होता है.
रिश्ते चलते रहते हैं
रुकते तो हम हैं

Wednesday, May 17, 2023

रिश्ते 26

रिश्तों का सौंदर्य 
एक दूसरे को 
समझने में निहित होता है
कोई स्वयं जैसा नहीं मिल सकता
कोई दो व्यक्ति एक से नहीं हो सकते
जब कभी अपने जैसे की खोज करने निकलते हैं
अकेले रह जाते हैं
निर्णय आपका है
आप अकेले चलने में विश्वास करते हैं
या साथ चलने में
आप आगे या पीछे चलने में विश्वास करते हैं
या साथ चलने में
अपनी सीमाएँ निर्धारित कीजिए
उनके अन्तर्गत
दूसरों के अनुसार
अपने को ढालने का प्रयास कीजिए
रिश्ते बनेंगे
अच्छे चलेंगे
चलते रहेंगे
इसको झुकना नहीं समझना कहते हैं
और
रिश्तों का सौंदर्य
एक दूसरे को समझने में निहित होता है
समझदारी से
चलने दीजिए रिश्तों को
रिश्तों में जीवन को

Saturday, April 1, 2023

रिश्ते 25

रिश्तों को बनाना, 
निभाना व जीवित रखना भी 
एक कला होती है. 
कई बार 
यह व्यक्ति के स्वभाव पर भी 
निर्भर करता है 
और जिसके साथ 
रिश्ता बनाया जा रहा होता है, 
उसके प्रभाव पर भी. 

कुछ लोग इस कला में 
पारंगत होते हैं 
और इस कला के माध्यम से 
रिश्तों का आनंद लेते हैं. 

किसी भी और कला की भाँति 
इसको भी सीखा जा सकता है 
और निपुणता हासिल की जा सकती है. 

परिवेश व परिस्थिति भी 
कई बार इस कला को 
विकसित करने में सहयोग करते हैं. 

समय एक सशक्त प्रशिक्षक की 
भूमिका निभाता है 
और अपने इस भाव से 
रिश्तों को निभाने की कला सिखाता है. 

रिश्तों को जीवित रखना 
व ख़त्म होते रिश्तों को पुनर्जीवित करना 
कठिन अवश्य होता है 
परंतु आत्मसंतुष्टि से भर देता है. 

रिश्ते फिर चल पड़ते हैं.

Saturday, December 31, 2022

रिश्ते 24

रिश्तों के बीज 
बोए जाते हैं, 
बीज से पौधा, 
पौधे से पेड़, 
और फिर वृक्ष 
बन जाते हैं रिश्ते. 

रिश्ते कई बार 
स्वयं अंकुरित होते हैं,
कई बार 
बिना किसी प्रयास के 
रिश्ते जन्म लेते हैं, 
फूल बन महकते हैं, 
तो कभी काँटे बन 
चुभते भी हैं रिश्ते. 

पौधों से वृक्ष बनने की 
प्रक्रिया में 
रिश्ते भिन्न प्रकारों के 
उतार-चढ़ाव का 
सामना करते हैं. 

रिश्ते निभाने से चलते हैं, 
जीवित रहते हैं, 
फिर चाहे वे 
मानवीय प्रयासों से पैदा हुए हों 
या बिना किसी प्रयासों के, 
आशय से परे. 

बीज पर काफ़ी कुछ निर्भर करता है 
रिश्तों का रूप-स्वरूप-प्रारूप, 
उनके पोषण पर भी, 
कई रिश्ते 
कुपोषण का शिकार हो जाते हैं. 

रिश्तों के पेड़ 
अपनी जड़ व शाखाओं से 
विकसित व पल्लवित होते हैं. 
पेड़ से वृक्ष बने रिश्ते 
संरक्षण व सुरक्षा की छतरी लगाकर 
निभाए जाते हैं. 

रिश्ते कई बार 
बिना किसी आशय से 
बड़े हो जाते हैं, 
चलते हैं, 
दौड़ते हैं. 
रुकते तो हम हैं.

Friday, November 4, 2022

रिश्ते 23

रिश्ते 
इंद्रजाल की भाँति होते हैं, 
जुड़े हुए, 
मुड़े हुए, 
समझ से परे भी, 
सरल भी, 
कठिन भी, 
उलझे भी 
और कुछ-कुछ सुलझे भी, 
अपेक्षा और उपेक्षा से घिरे, 
फूल की भाँति कोमल 
और शूल जैसे पैने भी. 

सचमुच अनोखा होता है, 
रिश्तों का इंद्रजाल 
जाना सा भी 
और अनजाना भी, 
इसकी गाँठें 
इतनी तरतीब 
व मज़बूती से बंधी होती हैं 
कि इनको खोलना 
नामुमकिन सा होता है, 
इनका क्षेत्र 
जीवन के साथ बढ़ता जाता है, 
और विस्तृत होता जाता है, 
जीविका के कारकों से लेकर 
जीविकोपार्जन के कारणों तक, 
इनका नेटवर्क बढ़ता जाता है 
जो रिश्तों को 
कालजयी बनाता है. 

रिश्ते चलते रहते हैं,
अपने क्षेत्रफल 
और घनत्व की 
परवाह किए बिना  
रिश्ते चलते रहते हैं,
रुकते तो हम हैं. 

Thursday, September 1, 2022

रिश्ते 22

रिश्ते 
अपने आप नहीं मरते 
बल्कि हम लोग 
अपने कृत्यों द्वारा 
उन्हें मार देते हैं.

जब रिश्तों में 
द्वेष और कलह का प्रवेश होता है 
उनकी हड्डी कमजोर हो जाती है.
कमज़ोर रिश्ते 
रीढ़ को 
कमज़ोर करते हैं 
और मज़बूत रिश्ते 
रीढ़ को 
बल प्रदान करते हैं.
 
जब कभी रिश्तों में 
नज़रअंदाज़ी बरती जाती है
खून की कमी 
महसूस होने लगती है
और जब रिश्ते 
ग़लतफ़हमी का शिकार होने लगते हैं
रिश्ते अपनी 
अंतिम साँसें ले रहे होते हैं.

रिश्ते अपने आप नहीं मरते 
बल्कि हम उन्हें मार देते हैं, 
कभी बेपरवाही से
कभी नज़रअंदाज़ी से
कभी अहंकार से
तो कभी दुर्व्यवहार से. 

रिश्तों को सहेजना होता है 
पालना होता है
धैर्य से
धीर से
सँभालना होता है
अपने प्रयासों द्वारा
संयम से
सजगता से.

और ऐसे रिश्ते चलते हैं
रुकते तो हम हैं.

Wednesday, June 29, 2022

रिश्ते - 21

यों तो 
रिश्तों के अपने स्वाद होते हैं, 
परंतु कई बार 
स्वाद, 
रिश्तों में भी होते हैं - 
मीठे, नमकीन, खट्टे, तीखे, कड़वे, कसैले. 
स्वाद समय पर भी निर्भर करता है
और रिश्तों पर भी 

एक व्यक्ति इन सभी स्वादों का 
अनुभव करना चाहता है, 
वह तथानुसार रिश्ते चुनता है. 

दोस्ती का रिश्ता मीठा होता है 
दो प्रेमियों की तरह, 
पति-पत्नी का रिश्ता 
नमकीन भी होता है, मीठा भी, 
भाई-बहन का रिश्ता 
खट्टा, मीठा व नमकीन होता है, 
प्रायः सास-बहू व ननद-भाभी के रिश्ते में 
तीखेपन का अनुभव होता है 
जो कभी-कभी कसैला भी हो जाता है 
और खट्टा भी, 
वहीं देवर-भाभी और जीजा-साली के रिश्ते 
ख़ट्टे-मीठे-नमकीन रहते हैं. 

इन सभी स्वादों से गुज़रते रिश्ते में 
जब संदेह व अविश्वास का प्रवेश होता है 
तो रिश्ते कड़वे हो जाते हैं. 

उसी क्षण रहीम याद आते हैं - 

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय

रिश्तों में स्वाद बना रहे 
और उनमें 
कभी कड़वापन घर न कर पाए 
ऐसे प्रयास होने चाहिए 
जो रिश्तों को बखूबी निभाने में 
निहित होते हैं. 

रिश्तों के स्वाद 
रोचक व मनमोहक होते हैं. 
रिश्ते चलते रहते हैं मदमस्त, 
गति सीमा से परे, 
रुकते तो हम हैं

Wednesday, February 9, 2022

रिश्ते - 20

कहीं पढ़ा था -
नज़र का इलाज़ किया जा सकता है नज़रिए का नहीं,
इस कथन का रिश्तों के निभाने में बहुत महत्व होता है.
कई बार हम दूसरों के नज़रिए का इलाज करने में
अपना बहुमूल्य समय बर्बाद करते हैं.
जैसा है वैसा स्वीकार करने से रिश्ते बेहतर होते हैं
और बिना इस पर ध्यान दिए
कि दूसरे का नज़रिया ग़लत है
यदि हम अपने कर्तव्य का निर्वाहन करते रहते हैं
तो रिश्ते केवल जीवित ही नहीं रहते
बल्कि प्रगाढ़ भी होते हैं.
जब रिश्ते मूल हैं, प्रधान हैं
तो बाक़ी सब गौण हो जाना चाहिए.
इसको समझना व इस पर अमल करना
सफल जीवन जीने की एक प्रमुख चुनौती है.
हर प्रकार के रिश्ते में इसका महत्व है.
यदि हम जान जाएँ व इसको पूरी तरह से मान लें
कि दूसरे का नज़रिया बदलना बहुत मुश्किल है
या यों कहें कि नामुमकिन है,
तो शायद हम रिश्तों को भली प्रकार व आनन्दपूर्वक जी पायेंगे.
और यदि नज़रिया बदलना ही है
तो स्वयं का बदलें
और रिश्तों को उनके रूप में स्वीकार करें
क्योंकि नज़र का इलाज किया जा सकता है.
नज़रिए का नहीं.

रिश्ते 19

दरवाज़ों से प्रवेश करते हैं रिश्ते
चौखटें लांघते हैं
खिड़कियों से झांकते हैं
रोशनदानों को निहारते हैं
चहारदीवारी पर छलांग लगाते हैं
छतों पर घूमते हैं
दुछत्तियों में छिपते हैं
कमरों में भटकते हैं

रिश्ते पर्दे हटाते हैं और डालते भी हैं
करवटें बदलते हैं
दरारों से झांकते हैं
कई बार कोनों में दुबकते भी हैं
आँगन में छाँव तलाशते हैं
परछाई से साथ चलते हैं

दीवारों पर टांग दिए जाते हैं
बड़े क़रीने से
फूलमालाओं के साथ
रिश्ते चलते रहते हैं
यादों के साथ
रुकते तो हम हैं.


Saturday, April 17, 2021

रिश्ते 18

रिश्तों के अपने रंग होते हैं
हम कई बार अपने प्रयासों के द्वारा 
रिश्तों में रंग भरते हैं
रिश्तों को रंगीन रखना 
संकल्प भी हो सकता है 
और विकल्प भी
कुछ भी हो 
रिश्तों की रंगीनियत सभी को लुभाती है 
अच्छी लगती है
रिश्ते कभी लाल होते हैं, कभी पीले
कभी-कभी नीले भी हो जाते हैं रिश्ते
रिश्ते सफ़ेद भी होते हैं और काले भी
अधिकतर स्लेटी होते हैं रिश्ते
कुछ काले, कुछ सफ़ेद, ढके भी, खुले भी 
गुलाबी रिश्तों का अपना ही मज़ा होता है 
इनमें एक ओर आनंद होता है 
तो दूसरी ओर नशा होता है
रिश्तों को कई बार बैंगनी बनाने का
या ऐसा दिखाने का प्रयास किया जाता है 
कुछ रिश्ते वास्तव में बैंगनी होते हैं
बहुत ऊँची उड़ान भरते हैं ऐसे रिश्ते
रिश्तों को हरा भी रखा जाता है
उनको सींचा जाता है
कई बार रिश्ते स्वतः ही हरे हो जाते हैं
हरे लगने लगते हैं
रिश्ते हरे रहते हैं
गीले रहते हैं
सूख तो हम जाते हैं

रिश्ते 17

रिश्ते
कानों से देखते हैं,
नाक से सुनते हैं,
आँखों से सूंघते हैं,
हाथों से चलते हैं,
पैरों से पकड़ते हैं,
दिल को छूते हैं,
बिना चेहरे के महसूस होते हैं,
बिना दिमाग़ के चलते हैं, जीवित रहते हैं,
बिना अंग के स्पर्श करते हैं,

रिश्ते
अंगों से परे होते हैं,
रिश्ते बस मन से चलते हैं,
प्रगाढ़ व विराट रूप में,
अमरत्व को प्राप्त करते हैं,
इस प्रकार के किसी भी आशय से परे,
रिश्ते चलते रहते हैं

Sunday, April 11, 2021

रिश्ते 16

रिश्ते कई बार हो जाते हैं पहाड़
और हवा भी हो जाते हैं
बन सूरज आशा की किरण जगाते हैं,
रोशनी का माध्यम बनते हैं
और कभी कभी जलाते भी हैं अपने ताप से
चाँदनी की चादर ओढ़े रिश्ते
जीवन में बनते हैं
रोमांस का कारण
और कष्टों का निवारण भी.
रिश्ते ओस की बूँद बन टपकते भी हैं
और महकते भी हैं, कस्तूरी बन
जीवन के कैन्वस पर रिश्ते
एक ऐसी रंगीन तस्वीर बनाते हैं
जो भरपूर होती है
पहाड़, बाग़ान, सूरज, किरणें, बूँदें, पानी, पुष्प, काँटे, आदि इत्यादि से
उन सभी भावनाओं व भावों को दर्शाती है यह तस्वीर
जो हिस्सा होती है
उसके बनाने बाले की कल्पनाओं का
रिश्ते बनते हैं कल्पनाओं का आधार
अपने वास्तविक रूप से
और उन्हें प्रभावित करते हैं

रिश्ते बहुत कुछ निर्धारित करते हैं
रास्ता भी, हमराही भी
पथ भी, पाथेय भी
चलना भी, रुकना भी
कमोबेश रिश्ते चलते रहते हैं
रुकते तो हम हैं.

रिश्ते 35

रिश्तों का भूगोल निराला होता है दूरियाँ या नज़दीकियाँ उतनी महत्वपूर्ण नहीं होतीं  जितना रिश्तों को बनाये रखने का आशय व रिश्तों में विश्यास, ...