भाषा अनुभूति को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। जीवन को देखने का सबका दृष्टिकोण अलग होता है। चिंतन व मंथन से विचार का जन्म होता है, वहीं अवलोकन से अनुभूति के दर्शन का ज्ञान होता है। जो कुछ अच्छा लगता है, उसको अपने नैसर्गिक प्रवाह में रखने का मेरा प्रयास है यह ब्लॉग। भाषा के बंधन से परे ..
Saturday, April 17, 2021
रिश्ते 18
रिश्ते 17
कानों से देखते हैं,
नाक से सुनते हैं,
आँखों से सूंघते हैं,
हाथों से चलते हैं,
पैरों से पकड़ते हैं,
दिल को छूते हैं,
बिना चेहरे के महसूस होते हैं,
बिना दिमाग़ के चलते हैं, जीवित रहते हैं,
बिना अंग के स्पर्श करते हैं,
अंगों से परे होते हैं,
रिश्ते बस मन से चलते हैं,
प्रगाढ़ व विराट रूप में,
अमरत्व को प्राप्त करते हैं,
इस प्रकार के किसी भी आशय से परे,
रिश्ते चलते रहते हैं
Sunday, April 11, 2021
रिश्ते 16
और हवा भी हो जाते हैं
बन सूरज आशा की किरण जगाते हैं,
रोशनी का माध्यम बनते हैं
और कभी कभी जलाते भी हैं अपने ताप से
चाँदनी की चादर ओढ़े रिश्ते
जीवन में बनते हैं
रोमांस का कारण
और कष्टों का निवारण भी.
रिश्ते ओस की बूँद बन टपकते भी हैं
और महकते भी हैं, कस्तूरी बन
जीवन के कैन्वस पर रिश्ते
एक ऐसी रंगीन तस्वीर बनाते हैं
जो भरपूर होती है
पहाड़, बाग़ान, सूरज, किरणें, बूँदें, पानी, पुष्प, काँटे, आदि इत्यादि से
उन सभी भावनाओं व भावों को दर्शाती है यह तस्वीर
जो हिस्सा होती है
उसके बनाने बाले की कल्पनाओं का
रिश्ते बनते हैं कल्पनाओं का आधार
अपने वास्तविक रूप से
और उन्हें प्रभावित करते हैं
रिश्ते बहुत कुछ निर्धारित करते हैं
रास्ता भी, हमराही भी
पथ भी, पाथेय भी
चलना भी, रुकना भी
कमोबेश रिश्ते चलते रहते हैं
रुकते तो हम हैं.
Sunday, April 4, 2021
रिश्ते 15
रिश्ते 14
रिश्ते की पहचान करना मुश्किल होता है,
रिश्ते 13
कई बार रिश्ते बांधते हैं
तो कई बार स्वतंत्र करते हैं, आज़ाद करते हैं
आज़ादी के रिश्ते दिलचस्प होते हैं, प्रगाढ़ भी
रिश्तों में आज़ादी होना
परस्पर प्रेम को और गहन बनाता है
और नई सम्भावनाओं को जन्म देता है
यों तो रिश्तों का इंद्रजाल बड़ता जाता है
और कई बार उलझता सा लगता है
परंतु फिर भी रिश्तों की अपनी स्वतंत्रता होती है
जिसके बल पर हम अपने पंखों को
खुले आकाश में फैलाते हैं
और नए-नए रिश्ते बनाते हैं
रिश्तों का आसमान विराट होता है
जो अपनी जड़ों के साथ-साथ रहते हुए भी
विस्तार का कारण बनता है
इस विस्तार की प्रक्रिया में
मानसिकता का अपना महत्व होता है
जो समय के साथ परिपक्व होती है
और रिश्तों को निभाने की ऊर्जा बनती है
Sunday, March 28, 2021
रिश्ते 12
पति-पत्नी के रिश्ते अजीब होते हैं. रोचक भी, इस रिश्ते का जन्म विवाह बंधन से होता है जो एक पुरुष व महिला को साथ रहने की सामाजिक संस्तुति प्रदान करते हैं. इस रिश्ते के मूल में ही बंधन होता है, किसी भी और रिश्ते से अलग. एक दूसरे के साथ का बन्धन, साथ निभाने का बन्धन भी और पारस्परिक धर्म भी, हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का धर्म.
यों तो ऐसा भी विश्वास है कि पति-पत्नी का रिश्ता ईश्वर बना कर भेजता है, हमारी परीक्षा इस पहले से बनी जोड़ी को ढूँढने, रिश्ता बनाने व उसे निभाने की होती है. रिश्ते-ही-रिश्ते वाले विज्ञापन बहुत सहयोग देते हैं इस खोज में, ख़रीद-फ़रोख़्त भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, रिश्तों का मोल-भाव व तोल-मोल इस प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग होता है जिसमें बिचौलियों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है. कई बार. माता-पिता व अन्य घनिष्ठ सम्बन्धियों की चिंता का विषय इन रिश्तों को ढूँढना हो जाता है, पूरा परिवार इस प्रक्रिया में सहयोग करता है व जब उपयुक्त वर या वधू का चुनाव हो जाता है, समस्त परिवार के लिए यह एक ख़ुशी का कारण बन जाता है,
विवाह उपरांत, जीवन पर्यन्त इसी कश्मकश में लगे रहते हैं कि कैसे पति-पत्नी के इस रिश्ते में रस घोला जाए, इसे आनन्दमय बनाया जाए, इसे दोस्ती में बदला जाए, इसे खुलकर जीने लायक़ बनाया जाए. इसमें कहीं न कहीं ऐसी स्वीकारोक्ति होती है कि क्योंकि यह पहले से निर्धारित था, हमें इस बन्धन में रहते हुए आनंद की तलाश करनी है. खून के रिश्ते से बहुत अलग होते हैं ऐसे रिश्ते. सहयोग. सहवास. सहभागिता, सामंजस्य, समझौता, समर्पण, समग्रता जैसे भाव समाहित होते हैं इस रिश्ते में.
जितना प्रेम का दिखावा पति-पत्नी के रिश्ते में होता है शायद ही किसी और रिश्ते में होता हो. हाथी के दाँतों की भाँति बहुत कुछ छुपाते हैं यह रिश्ते, इस रिश्ते के मूल में संतान प्राप्ति से व बृद्धि का भाव होता है. परंतु परस्पर प्रेम इस रिश्ते को आनन्द्दायक बना देता है. भले ही पति-पत्नी के रिश्ते की बुनियाद प्रेम न होती हो, शनैः शनैः प्रेम ऐसे रिश्ते की पूँजी बन जाता है. एक दूसरे की आदतों व चाहतों को स्वीकार करना, परस्पर आदर और विश्वास, रिश्ते को मज़बूत करते हैं, समय व संयम के निवेश से बना यह रिश्ता उस आत्मीय भावना को जागृत करता है जो कई बार अकल्पनीय प्रतीत होती है. एक दूसरे की आदतों के साथ जीते-जीते, कब दोनो एक दूसरे की आदत बन जाते हैं पता ही नहीं चलता. एक सच्चे प्रेम की अनुभूति से सराबोर यह रिश्ता हमेशा चलता रहता है, सात जन्मों तक, ऐसे रिश्ते लाखों में एक होते हैं, सामान्यतः अपवाद होते हैं ऐसे रिश्ते. यों तो यह भी कहा जाता है कि नोकझोंक, रूठना-मनाना, वाद-विवाद, तकरार इस रिश्ते को रोचक व मज़बूत बनाते हैं परंतु मेरा मानना यह है कि सच्चा प्रेम इन सभी प्रकार की क्रियाओं से परे होता है, पूर्ण समर्पण, बिना किसी अपेक्षा, पूर्वाग्रह या जोड़घटाने के, सच्चे प्यार को जन्म देता है, यह दिव्य भावना विवाह बन्धन को शक्ति प्रदान करती है. बल्कि बन्धन से मुक्त करती है. यही मुक्ति जीवन को परमआनंद की ओर ले जाती है. ऐसे रिश्ते अमरत्व को प्राप्त हो जाते हैं.
पति-पत्नी के रिश्ते से उत्पन्न संतान के साथ खून का रिश्ता होता है, कभी कभी विवाह बन्धन से इतर भी. इस खून के रिश्ते के कारण भी पति-पत्नी के रिश्ते बने रहते हैं, बच्चों द्वारा इस रिश्ते में फ़ेविकोल का जोड़ स्थापित होता है, बच्चों को ढाल बनाकर कई बार इन रिश्तों को चलाया व जीवित रखा जाता है. यही पति-पत्नी के रिश्ते को साथ जीने की ऊर्जा भी देता है, माता-पिता के रूप में, उन दोनों का बच्चों के प्रति अशर्त, आत्मीय. व खूनी रिश्ते का प्रेम, उनके रिश्ते को बांधे रहता है, चलता रहता है, अंतर्विरोधों के बावजूद. पति-पत्नी के रिश्ते में एक दूसरे के प्रति कृतज्ञता का भाव बच्चों के जन्म से उपजता है, व बच्चों के क्रिया कलापों द्वारा फलीभूत होता है, कई बार परस्पर कृतज्ञता का यही भाव रिश्ते को जीवित रखने का कारण बन जाता है, बच्चों के माध्यम से पति-पत्नी का रिश्ता खून के रिश्ते में बदल जाता है और चलता रहता है.
रिश्ते 37
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