Tuesday, November 14, 2023

रिश्ते 28

रिश्ते पानी की तरह
साफ़ होते हैं
तो नदी बन
समंदर हो जाते हैं. 

रिश्ते बर्फ़ की तरह
जम भी जाते हैं
और हिम सागर भाँति
पिघलते भी हैं. 

रिश्ते मजबूत होना 
अच्छा होता है
परंतु चिन्ता का विषय होता है
रिश्तों का पत्थर हो जाना.

रिश्तों में लोच ज़रूरी होता है
और लोच के सीमेंट से बने रिश्ते
मजबूत होकर भी पत्थर नहीं होते.

रिश्तों को मिट्टी होने से
बचाना भी होता है
और बिखरने से
सम्हालना भी होता है.

रोड़ी और रोड़े मिलकर
रिश्ते में मज़बूती लाते हैं.

रिश्ते हाथ से रेत की तरह
सरक भी जाते हैं
और ईंट की तरह खड़े भी रहते हैं.

ईंट का जवाब पत्थर से देने से
रिश्ते टूट जाते हैं.

ईंट से बने मकानों को
रिश्ते ही घर बनाते हैं.

ऐसा घर जहां
सुख-दुःख साथ-साथ रहते हैं
और 
जीवन को आनंदमय बनाते हैं.

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Friday, May 26, 2023

रिश्ते 27

रिश्तों का आकाश क्षेत्र, 
धरती के विस्तार की सीमा से
अधिक होता है
रिश्तों की सूक्ष्मता,
स्थूल कृत्यों से अभिव्यक्त
नहीं की जा सकती

शब्दों, संस्कारों और संधियों से
रिश्तों का निर्माण भी होता है 
और
विस्तार भी

रिश्तों की सूक्ष्मता
भाषा और व्यवहार
पर निर्भर करती है
शब्द स्थूल हैं 
और
शब्दों का भाव 
और उनकी भंगिमा
सूक्ष्म है
भाषा सूक्ष्म है

शब्दों कें प्रयोग का तरीक़ा
और व्यवहार
रिश्तों में स्थायित्व लाता है

रिश्तों का आकाश धन,
धरती के विस्तार की सीमा से
अधिक होता है.
रिश्ते चलते रहते हैं
रुकते तो हम हैं

Wednesday, May 17, 2023

रिश्ते 26

रिश्तों का सौंदर्य 
एक दूसरे को 
समझने में निहित होता है
कोई स्वयं जैसा नहीं मिल सकता
कोई दो व्यक्ति एक से नहीं हो सकते
जब कभी अपने जैसे की खोज करने निकलते हैं
अकेले रह जाते हैं
निर्णय आपका है
आप अकेले चलने में विश्वास करते हैं
या साथ चलने में
आप आगे या पीछे चलने में विश्वास करते हैं
या साथ चलने में
अपनी सीमाएँ निर्धारित कीजिए
उनके अन्तर्गत
दूसरों के अनुसार
अपने को ढालने का प्रयास कीजिए
रिश्ते बनेंगे
अच्छे चलेंगे
चलते रहेंगे
इसको झुकना नहीं समझना कहते हैं
और
रिश्तों का सौंदर्य
एक दूसरे को समझने में निहित होता है
समझदारी से
चलने दीजिए रिश्तों को
रिश्तों में जीवन को

Saturday, April 1, 2023

रिश्ते 25

रिश्तों को बनाना, 
निभाना व जीवित रखना भी 
एक कला होती है. 
कई बार 
यह व्यक्ति के स्वभाव पर भी 
निर्भर करता है 
और जिसके साथ 
रिश्ता बनाया जा रहा होता है, 
उसके प्रभाव पर भी. 

कुछ लोग इस कला में 
पारंगत होते हैं 
और इस कला के माध्यम से 
रिश्तों का आनंद लेते हैं. 

किसी भी और कला की भाँति 
इसको भी सीखा जा सकता है 
और निपुणता हासिल की जा सकती है. 

परिवेश व परिस्थिति भी 
कई बार इस कला को 
विकसित करने में सहयोग करते हैं. 

समय एक सशक्त प्रशिक्षक की 
भूमिका निभाता है 
और अपने इस भाव से 
रिश्तों को निभाने की कला सिखाता है. 

रिश्तों को जीवित रखना 
व ख़त्म होते रिश्तों को पुनर्जीवित करना 
कठिन अवश्य होता है 
परंतु आत्मसंतुष्टि से भर देता है. 

रिश्ते फिर चल पड़ते हैं.

Saturday, December 31, 2022

रिश्ते 24

रिश्तों के बीज 
बोए जाते हैं, 
बीज से पौधा, 
पौधे से पेड़, 
और फिर वृक्ष 
बन जाते हैं रिश्ते. 

रिश्ते कई बार 
स्वयं अंकुरित होते हैं,
कई बार 
बिना किसी प्रयास के 
रिश्ते जन्म लेते हैं, 
फूल बन महकते हैं, 
तो कभी काँटे बन 
चुभते भी हैं रिश्ते. 

पौधों से वृक्ष बनने की 
प्रक्रिया में 
रिश्ते भिन्न प्रकारों के 
उतार-चढ़ाव का 
सामना करते हैं. 

रिश्ते निभाने से चलते हैं, 
जीवित रहते हैं, 
फिर चाहे वे 
मानवीय प्रयासों से पैदा हुए हों 
या बिना किसी प्रयासों के, 
आशय से परे. 

बीज पर काफ़ी कुछ निर्भर करता है 
रिश्तों का रूप-स्वरूप-प्रारूप, 
उनके पोषण पर भी, 
कई रिश्ते 
कुपोषण का शिकार हो जाते हैं. 

रिश्तों के पेड़ 
अपनी जड़ व शाखाओं से 
विकसित व पल्लवित होते हैं. 
पेड़ से वृक्ष बने रिश्ते 
संरक्षण व सुरक्षा की छतरी लगाकर 
निभाए जाते हैं. 

रिश्ते कई बार 
बिना किसी आशय से 
बड़े हो जाते हैं, 
चलते हैं, 
दौड़ते हैं. 
रुकते तो हम हैं.

Friday, November 4, 2022

रिश्ते 23

रिश्ते 
इंद्रजाल की भाँति होते हैं, 
जुड़े हुए, 
मुड़े हुए, 
समझ से परे भी, 
सरल भी, 
कठिन भी, 
उलझे भी 
और कुछ-कुछ सुलझे भी, 
अपेक्षा और उपेक्षा से घिरे, 
फूल की भाँति कोमल 
और शूल जैसे पैने भी. 

सचमुच अनोखा होता है, 
रिश्तों का इंद्रजाल 
जाना सा भी 
और अनजाना भी, 
इसकी गाँठें 
इतनी तरतीब 
व मज़बूती से बंधी होती हैं 
कि इनको खोलना 
नामुमकिन सा होता है, 
इनका क्षेत्र 
जीवन के साथ बढ़ता जाता है, 
और विस्तृत होता जाता है, 
जीविका के कारकों से लेकर 
जीविकोपार्जन के कारणों तक, 
इनका नेटवर्क बढ़ता जाता है 
जो रिश्तों को 
कालजयी बनाता है. 

रिश्ते चलते रहते हैं,
अपने क्षेत्रफल 
और घनत्व की 
परवाह किए बिना  
रिश्ते चलते रहते हैं,
रुकते तो हम हैं. 

Friday, October 14, 2022

ओवरटेकिंग

आप जब किसी वाहन के पीछे चल रहे होते हैं तो कोशिश रहती है कि उसको ओवरटेक करके आगे बढ़ जाया जाये विशेष रूप से तब जब आगे चलने वाला वाहन धीरे चल रहा हो। हम अपने वाहन की गति तेज़ करते हैं और आगे चलने वाले वाहन को ओवरटेक करते हुए पीछे छोड़ देते हैं। यदि हम ओवरटेकिंग नहीं करते हैं तो आगे चलने वाले वाहन के चालक के हाथ हमारी गति निर्धारित करने का यंत्र चला जाता है और फिर हमारा सारा सफ़र हमसे आगे चलने वाला वाहन व उसका चालक ही निर्धारित करते हैं। 

आगे आने वाले मोड़, चौराहा व गली पर हमारी क्या गति होगी व क्या एक्शन होगा, आगे चलने वाला वाहन ही तय करता है। अक्सर उस वाहन के पीछे चलते-चलते हम अपनी दिशा भी भूल जाते है और उस वाहन की दिशा हमारी दिशा हो जाती है और अचानक हमको लगता है, हम कहाँ आ गए हैं, कहाँ पहुँच गए हैं, हमको यहाँ तो आना ही नहीं था, अरे कितनी देर हो गई चलते-चलते। इस प्रकार के प्रश्न परेशान करते है क्योंकि हमारी दिशा, हमारी गति हमारे स्वयं के द्वारा निर्धारित नहीं की गयी होती है। प्रश्न यह है कि इस के लिए कौन जिम्मेदार है। हम स्वयं, या हमारे आगे चलने वाला वाहन अथवा उसका चालक।

ऐसा भी होता है कि आगे चलने वाला वाहन व उसका चालक आपको ओवरटेक करने के लिए जगह ही न दे। आप डिपर का प्रयोग करते रहिये, हॉर्न बजाते रहिये, उसकी कान पर जूं नहीं रेंगती। कई बार वह अपने आगे होने की स्थिति का लाभ उठाता है, उसे पता है उसके बिना रास्ता दिए आप उसे ओवरटेक नहीं कर सकते। कई बार वह अपने वाहन को इस प्रकार चलाता है, कि आप किसी भी प्रकार से उससे आगे न निकल जाएँ। आपके रास्ते में रोड़े उत्पन्न किये जाते हैं, और आप मात्र एक मूकदर्शक बने स्वयं व परिस्थितियों को कोसते रहते हैं। इसीलिए रास्ते का चुनाव करना एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है।

अपने गन्तव्य पर पहुँचने के लिये दिशा का निर्धारण भी हमें स्वयं ही करना चाहिए और प्रयास यह होना चाहिए कि सफ़र के प्रारम्भ होने से पहले हम यह भी अनुमान लगा लें कि कितने समय में मैं उस स्थान पर पहुँच जाऊँगा। आजकल यंत्रों व तकनीक के माध्यम से यह बहुत आसान हो गया है। यदि रास्ते में किसी वाहन के कारण बाधा उत्पन्न हो रही हो तो उसको ओवरटेक कर दिया जाये। यही नहीं यदि हमारी गति से कम गति से चलने वाला वाहन आगे हो तो नियमानुसार उसको ओवरटेक करने में हमें कोई विलम्ब नहीं करना चाहिए। हम अपने गन्तव्य पर जल्दी पहुँच सकते हैं।

प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर कोई एक दूसरे को ओवरटेक करने में लगा है और यदि सभी नियमों का पालन करते हुए ऐसा कर रहे हैं तो आखिर इसमें गलत क्या है। इस बात पर ध्यान देना अवश्य आवश्यक होगा कि कहीं इस ओवरटेकिंग में कोई दुर्घटना न हो जाये, किसी को कोई क्षति न हो, किसी वाहन पर कोई खरोच न आ जाये, जल्दी में कहीं लालबत्ती को भूल न जाएँ। इन सभी बिंदुओं पर ध्यान देते हुए यदि हम आगे बढ़ें तो बेहतर होगा। हम गतिसीमा में रहते हुए अपने गन्तव्यों की ओर अग्रसर रहें और अपनी दिशा का निर्धारण स्वयं करें तो गन्तव्य पर पहुंचकर एक संतुष्टि की अनुभूति अवश्य होगी। आखिर हम अपना रिमोट किसी और को क्यों दें। किसी और व्यक्ति को, किसी परिस्थिति को, किसी घटना को, या किसी वस्तु विशेष को।

अपने जीवन में भी हमें इससे सीख लेनी चाहिए। जीवन का मन्त्र चलना है और रास्ते का आनंद लेना है, रास्ते में मिले राहियों को याद रखना, उनके साथ वितायें क्षणों को अपनी स्म्रति में संजोना, उनसे मिली पॉजिटिव ऊर्जा को अपने सपनो को साकार करने में लगाना, चलना, चलते रहना, अपनी मंज़िल की ओर अग्रसर रहना, नए नए सपने देखना, धीमी गति से चल रहे लोगो को अपनी गति तीब्र करने हेतु प्रेरित करना, या फिर उनको ओवरटेक कर आगे बढ़ना, चलते रहना, रास्तों में, विचारों में, वाहनों में, सपनो में, हमेशा यहाँ तक कि विश्राम करने में भी चलने का ध्यान रखना नहीं तो हम सब को अंतिम विश्राम तो लेना ही है।


[22 नवम्बर 2015। अजमेर-दिल्ली शताब्दी। रात्रि 8:40।]

रिश्ते 37

 रिश्तों का गणित अनूठा होता है जहाँ बताना और जताना गिनाना और दिखाना बातचीत का केंद्र होते हैं तराजू लिए लोग नापने-तोलने में व्यस्त रहते हैं ...